Thursday, December 17, 2009

हमारा भाग्य हमारे हाथो में है!

भाग्य - आज शायद बहूत सारे भाग्य को मानते है , अपनी जीवन की हर कड़ी को भाग्य से जोड़ते हुए अपने आने वाले कल का फैसला करते है! आज हर कोई अपने भाग्य से लड़ना चाहता है वोह चाहता है की उसका भाग्य उसका साथ हर जगह दे... परन्तु क्या आप जानते है ? भाग्य क्या है और इसका फैसला कैसे होता है...

मैं यहाँ कुछ ऐसी बातों का वर्णन करने जा राइ हूँ जिस बात से कुछ लोग सहमत होंगे पर कुछ नहीं...

भाग्य शब्द से अभिप्राय है जो कुछ भी बागवान लिखा है बाले ही अच्छा हो या बुरा ! परन्तु मैं यह नहीं मानती, भगवान् ने हमारे भगाया लिखा है  पर वोह हमारे जनम और मरण तक सीमित है. ( मैं यहाँ धर्म से जुडी बातों का वर्णन नहीं कर रही और न ही करना चाहती हूँ मैं एक इन्सान की नजरो से जो महसूस किया है बस उन् बातों का आपके समक्ष रख रही हूँ !

जैसे मैंने ऊपर लिखा है मरण और जीवन भगवान् ने लिखा है परन्तु हम अपने जीवन में कैसा मुकाम पायेंगे ये हमारे हाथों में है... कोई गरीब होता है तो कोई अमीर लेकिन इसका मतलब ये नहीं की गरीब अमीर नहीं बन सकता और अमीर गरीब नहीं... जहाँ तक मैंने सुना और पड़ा ये देखा है ये जाना है वोह ये की आज जितने लोग कामयाब है उनमे से अधिकतर लोग निम्न स्तर से उच्च स्तर की और गए है जो भी जीवन वोह आज जी रहे है वोह उन्होंने खुद अपने लिए अपने अंतर्मन से चुना है!

जब भी हम गलत होते है हाँ भगवान् हमें सही राह दिखाते है पर उस इस्शारे को समझ के अपना और उसको अनदेखा करना इंसान के हित में ही होता है ...

एक कहानी सुनाती हूँ :- ( शायद आपने कभी सुनी होगी !)

एक बार एक गाव में बाद आ जाती है सब लोग नाव की मदद से सुरक्षित स्तान पर जाने लगते है परन्तु एक व्यक्ति नहीं जाता और अपने घर की पहली मंजिल में चढ़ जाता है..जब लोग उसके घर के बहार से नाव की मदद से दूसरी जगह जा रहे होते है तो उसको कहते है - भाई चलो बाढ़  नहीं रुकने वाली - तो वोह कहता है - मैं नहीं जाऊंगा भगवान् बचायेंगे ...( फिर वोह गाव वाले चले जाते है ) ... बाढ़ का पानी और ऊपर बढता है तो वोह व्यक्ति घर की दूसरी मंजिल में चढ़ जाता है - गाव वाले फिर बुलाते है - वोह फिर कहता है मैं नहीं आऊंगा मुझे भगवान् बचायेंगे... ( फिर गाव वाले चले जाते है ) ...बाढ़ का पानी और बढता है और वोह व्यक्ति अपने घर की तीसरी मंजिल में चढ़ जाता है - फिर गाव वाले उसको बुलाते है - वोह फिर मना कर देता है और कहता है भगवान् मुझे बचायेंगे...( गाव वाले फिर चले जाते है ) - बाढ़ का पानी और बढता है और वोह व्यक्ति अपना जीवन खो देता है ---

इस कहानी से मैं ये कहना चाहती हूँ की भगवान् ने उसके जीवन का अंत नहीं लिखा था परन्तु भगवान् के बार बार दिए मौके को अनदेखा कर उसने खुद अपने लिए ऐसा भाग्य चुना जिससे उससे अपनी ज़िन्दगी खो दी...

इसी प्रकार हमारा भाग्य हमारे हाथों में होता है अपने अपनी सूझ भूझ से अपने सामने आने वाले मौके को पहचानना चाहिए और अपने जीवन की  लक्ष्य की और निरंतर बड़ते रहना चाहिए...

हमारा भाग्य हमारे हाथो में है चाहे तो हम इसे बिगाड़ सकते है या तो सवार सकते है...शांत मन हमें अपने भाग्य को सवारने में हमारी मदद करता है है...

क्या कहते है आप ?

लेखिखा 
दिव्या    



6 comments:

  1. इस कहानी से ये साबि‍त होता है कि‍ भाग्‍य से कुछ लोग बच जातें और कुछ लोग ऊपरी मंजि‍लों पर चढ़ते चढ़ते भाग्‍यवश मर जाते हैं। भाग्‍य का होना या ना होना नहीं .... नहीं ????
    मतलब भाग्‍य को मानना या ना मानना भी क्‍या भाग्‍य के दायरे में नहीं आता???

    ReplyDelete
  2. भाग्य को अपना काम करने दो...लेकिन हमे भी सपलता पाने के लिए कोशिश करनी चाहिए....शायद आप यही कहना चाहते हैं...

    ReplyDelete
  3. सपलता को सफलता पढ़े।

    ReplyDelete
  4. "Bhagiyye" naa jaane kyun is par ek prishn chinn laga hua hai, laikhika ne apne eshsaason ko apne is lakih mai wayakt kia hai, jo bhut had tak sahi hai, mujhay yaad aata hai ki ek shayar ne kaha hai"mout ka ek din moayyan hai,,,neend raat bhar kyu.n nahi aati" ye sher us universal trouth ko bayaan karta hai jo waastav mai ek sachchi haqeeqat hai, jis wqt hume is duniya ka khoobsurat hissa banaya jaata hai usi par hamaare maathy par un lakeero.n ka bhi ek khaka takhleeq kia jaata hai jo hamari qismat bannae waali hai, kehne ka matlab ye ki yaqeenan agr hum ghareeb hai to ameer kaise ban sakte hain iska raasta bhi hota hai, magr wo ke jisne hame banaya hai wo achi tarhaan jaanta hai ki hamari fitrat kya hai aur hum kis simt jaane waale hain bas yahi se hamaari qismat ki daastan shur hoti hai aur anjaam ko phuchti hai, aur majbooran shayad hame ye kehna hai padta hai "zindagi jaisi tawaqqo thi nahi kuch kam hai,, har ghadi hota hai ehsaas kahin kuch kam hai"(quoted sher of seheryaar sahib)

    ReplyDelete
  5. बिलकुल ठीक .. भाग्य भी उसी का साथ देता है जिसे खुद पर यकीन हो..

    ReplyDelete
  6. bahoot shukriya aap sab ka jo aapne apna kimati wakt mere blog ko diya...

    Kya aap jante hai jitne bhi kamiyaab log hai woh kehte hai aaj jo kuch bhi hai unke pass woh unko bhagwaan k ashirwaad se or khud ki mehnat se mila par jo log Nakaam hai woh apna dosh apni kismat k matte jad dete hai...

    ReplyDelete